[New] Shaheed Diwas (Martyrs’ Day) Shayari And Massage 2021

Today’s post is special. Today’s post is written for the sacrifices of the Army, the Police and the Freedom Fighters who were martyred for India. In this article, we have shared such Shaheed Diwas (Martyrs’ Day) Shayari that awaken our love for the country, and with it, photos of patriotism are also uploaded.so please read full article and share with your friends and family.

Shahid Diwas Par Shayari in Hindi

मैं जला हुआ राख नही, अमर दीप हूँ,
जो मिट गया वतन पर, मैं वो शहीद हूँ

न इंतिज़ार करो इनका ऐ अज़ा-दारो
शहीद जाते हैं जन्नत को घर नहीं आते
-साबिर ज़फ़र

शहीदों को याद करने का आया दिन,
भर लेते है उनकी यादों से अपना मन.
देश की खातिर अगर हम कुछ कर पाए,
तो इनकी तरह धन्य होगा हमारा जीवन .

Unhe Yeh Fikar Hai Hardam
Nayi Taraz-E-Zafa Kya Hai
Humein Yeh Shaunk Hai Ke
Dekhe Sitam Ki Intehaa Kya Hai!
Jai Hindustan!

लड़े वो वीर जवानों की तरह
ठंडा खून भी फ़ौलाद हुआ
मरते-मरते भी कई मार गिराए
तभी तो देश आजाद हुआ

Check : Shahid Diwas Quotes And Massages

आओ झुक कर सलाम करे उनको, जिनके हिस्से में ये मुकाम आता है,
खुशनसीब होता है वो खून, जो देश के काम आता है,
देश के शहीदों को शत् शत् नमन

कुर्बान हुए जो उनकी
कुर्बानी याद करो,
ये आज़ादी मिली हमको
उनको सब मिलकर धन्यवाद करो.

 

न इंतिज़ार करो इनका ऐ अज़ा-दारो
शहीद जाते हैं जन्नत को घर नहीं आते
-साबिर ज़फ़र

जशन आज़ादी का मुबारक हो देश वालो को,
फंदे से मोहब्बत थी हम वतन के मतवालो को !!

जब देश में थी दिवाली… वो खेल रहे थे होली…
जब हम बैठे थे घरो में…… वो झेल रहे थे गोली…
क्या लोग थे वो अभिमानी… है धन्य उनकी जवानी…
जो शहीद हुए है उनकी… ज़रा याद करो कुर्बानी…
ए मेरे वतन के लोगो… तुम आँख में भर लो पानी…
देश के शहीदो को नमन।

लिख रहा हूं मैं अजांम जिसका कल आगाज आयेगा,
मेरे लहू का हर एक कतरा इकंलाब लाऐगा मैं रहूँ या ना रहूँ पर ये वादा है तुमसे मेरा कि,
मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आयेगा।

मेरी जिंदगी में सरहद की कोई शाम आए,
काश मेरी जिंदगी मेरे वतन के काम आए,
ना खौफ है मौत का ना आरजू है जन्नत की,
मगर जब कभी जिक्र हो शहीदों का,
काश मेरा भी नाम आए।

क्या मोल लग रहा है शहीदों के ख़ून का
मरते थे जिन पे हम वो सज़ा-याब क्या हुए
-साहिर लुधियानवी

देश की खातिर जान लुटा दी,
सारी ज़िन्दगी जेलों में बिता दी.
जिनके लिए सब कुछ था अपना चमन,
ऐसे वीरों को हमारा शत-शत नमन.

Zindagi Toh Sirf Apney Kandho
Par Jee Jati Hai Dusron Ke Kandhe
Par Toh Sirf Janazey Uthaye Jaatey Hain

मैं जला हुआ राख नहीं, अमर दीप हूँ
जो मिट गया वतन पर, मैं वो शहीद हूँ
जय हिन्द जय भारत

अपनी आज़ादी को हम हरगिज
भुला नहीं सकते
सर कटा सकते है लेकिन सर झुका सकते नहीं
देश के शहीदों को शत् शत् नमन
भारत माता की जय

indgi to sirf apne kandhon par
jee jati hai ai dost,

Dusron ke kandhon par to
Uthate hain janaze.

क्या मोल लग रहा है शहीदों के ख़ून का
मरते थे जिन पे हम वो सज़ा-याब क्या हुए
-साहिर लुधियानवी

शहीदों के सम्मान में शायरी
वतन वालों वतन ना बेच देना,
ये धरती ये चमन ना बेच देना,
शहीदों ने जान दी है वतन के वास्ते,
शहीदों के कफन ना बेच देना।

शहीदों की चिताओं पर जुड़ेंगे हर बरस मेले
वतन पर मरनेवालों का यही बाक़ी निशाँ होगा
– जगदंबा प्रसाद मिश्र ‘हितैषी’

जेलों में बंद रहकर,
सह ली थी यातनाए .
और एक हम है,
जिनसे छूटे ना वासनाए.

Shahid Divas Shayari in English

Sarfaroshi ki Tamanna
Ab Hamare Dil Mein Hai
Dekhna hai Zor Kitna Baju-e-katil
Mein hai Inqualab Zindabad

अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ भुला नहीं सकते
सर कटा सकते है लकिन सर झुका नहीं सकते
जय हिन्द जय भारत

इतनी सी बात हवाओं को बताये रखना,
रौशनी होगी चिरागों को जलाये रखना,
लहूँ देकर की है जिसकी हिफाजत हमने,
ऐसे तिरंगे को हमेशा अपने दिल में बसाये रखना
देश के शहीदों को शत् शत् नमन

जिन्दगी तो सिर्फ अपने कंधों पर
जी जाती है ऐ दोस्त,
दूसरों के कंधों पर तो
उठते हैं जनाजे.

Shahid Diwas Shayari Pic

शहीदों की चिताओं पर जुड़ेंगे हर बरस मेले
वतन पर मरनेवालों का यही बाक़ी निशाँ होगा
– जगदंबा प्रसाद मिश्र ‘हितैषी’

shaheed diwas shayari

ब तूम शहीद हुए थे,
तो ना जाने कैसे तुम्हारी माँ सोई होगी,
एक बात तो तय है,
तुम्हें लगने वाली गोली भी सौ बार रोई होगी।

जब देश में थी दीवाली, वो खेल रहे थे होली
जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली
-कवि प्रदीप

अर्ज़ किया है-
फांसी पर चढ़ गए थे,
इतिहास गढ़ गए थे.
ऐसे थे तीनो शूरवीर,
जो डर के आगे बढ़ गए थे.

shahid diwas shayari

Raakh Ke Har Ek Kan Meri
Garmi se Gatiman Hai
Main Aisa Pagal hu Jo Jail
Mein bhi Aazad Hai

जब तुम शहीद हुए थे
तो ना जाने कैसे तुम्हारी माँ सोई होगी
एक बात तो तय है
तुम्हे लगने वाली गोली भी सौ बार रोई होगी

Aur kuch hamare khoon me
Ho ya na ho ai dost,
Par apne desh ka pyar
to jarur hona chahiye.

जब देश में थी दीवाली, वो खेल रहे थे होली
जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली
-कवि प्रदीप

कभी कड़ाके की ठंड में ठिठुर के देख लेना,
कभी तपती धुप में चल के देख लेना,
कैसे होती है हिफाजत अपने देश की,
जरा सरहद पर जाकर देख लेना।

अजल से वे डरें जीने को जो अच्छा समझते हैं।
मियाँ! हम चार दिन की जिन्दगी को क्या समझते हैं?
– रामप्रसाद बिस्मिल

अर्ज़ किया है-
चलो शहीदों को श्रद्धांजलि दे,
उनके दिलों को तसल्ली दे .
जिस देश के लिए जान गवा दी,
उस देश को ना छल्ली होने दे .

Shaheedo Ki Chitaon Par
Lagege Har Baras Mele,
Watan Par Marne Walon
Ka Yahi Baki Nishaan Hoga!

फौजियों के लिए शहीद दिवस पर शायरी
मेरी जिंदगी में सरहद की कोई शाम आए
काश मेरी जिंदगी मेरे वतन के काम आए
ना खौफ है मौत का ना आरजू है जन्नत की
ख्वाईश बस इतनी सी है जब भी जिक्र हो शहीदों का तो मेरा भी नाम आए

Shahid Shayari in Hindi

और कुछ हमारे खून में हो ना हो
हो ना हो ऐ दोस्त,
पर अपने देश का प्यार
तो जरुर होना चाहिए.

अजल से वे डरें जीने को जो अच्छा समझते हैं।
मियाँ! हम चार दिन की जिन्दगी को क्या समझते हैं?
– रामप्रसाद बिस्मिल

आओ, झुक के सलाम करे उनको,
जिनके हिस्से में ये मुकाम आता है,
खुशनसीब होते है वो लोग,
जिनका खून देश के काम आता है।

मौत एक बार जब आना है तो डरना क्या है!
हम इसे खेल ही समझा किये मरना क्या है?
-अशफ़ाकउल्ला खां

शहीद कभी मरता नहीं,
वो अमर हो जाता है .
अपने प्राणों की आहुति देकर,
बेखबर हो जाता है .

Unhe Yeh Fikar Hai Hardam
Nayi Taraz-E-Zafa Kya Hai
Humein Yeh Shaunk Hai Ke
Dekhe Sitam Ki Intehaa Kya Hai!
Jai Hindustan!

कभी कड़ाके की ठंड में ठिठुर के देखना
कभी तपती धुप में चल के देखना
कैसे होती है हिफाजत अपने देश की
जरा सरहद पर जाकर देखना

जमाने भर में मिलते हैं आशिक कई,
मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता,
नोटों में भी लिपट कर,
सोने में सिमटकर मरे हैं कई,
मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता।

मेरी जिंदगी में सरहद की कोई शाम आए,
काश मेरी जिंदगी मेरे वतन के काम आए,
ना खौफ है मौत का, ना आरजू है जन्नत की,
मगर जब कभी जिक्र हो शहीदों का,
काश मेरा भी नाम आए।

चाहे अंग्रेजो ने उन्हें,
कितना भी सताया था.
मगर सच्चे देशभक्त होने का,
उन्होंने फ़र्ज़ निभाया था .

हाथ जोड़कर नमन जो करते, मत समझो कि हम कमजोर हैं
उठाओ कथायें देखो इतिहास, छाये हुए हम हर ओर हैं

मेरे जज्बातों से इस कदर वाकिफ हैं मेरी कलम
मैं इश्क भी लिखना चाहूँ तो भी, इंकलाब लिख जाता हैं !
– भगत सिंह

लड़े वो वीर जवानों की तरह,
ठंडा खून भी फौलाद हुआ,
मरते मरते भी कई मार गिराए,
तभी तो देश आजाद हुआ।

मेरे जज्बातों से इस कदर वाकिफ हैं मेरी कलम
मैं इश्क भी लिखना चाहूँ तो भी, इंकलाब लिख जाता हैं !
– भगत सिंह

जेलों में जवानिया गुज़ार दी,
अपनी जान देश पे वार दी .
सबसे प्यारा था जिनको अपना चमन,
ऐसे वीरों को शत-शत नमन .

वतन वालो वतन ना बेच देना
ये धरती ये चमन ना बेच देना
शहीदों ने जान दी है वतन के वास्ते
शहीदों के कफन ना बेच देना

मर के पाया शहीद का रुत्बा
मेरी इस ज़िंदगी की उम्र दराज़
-जोश मलीहाबादी

शहीद दिवस शायरी इन हिंदी

इतनी सी बात हवाओं को बताए रखना,
रोशनी होगी चिरागों को जलाए रखना,
लहू देकर की है जिसकी हिफाजत हमने,
ऐसे तिरंगे को हमेशा अपने दिल में बसाए रखना।

मर के पाया शहीद का रुत्बा
मेरी इस ज़िंदगी की उम्र दराज़
-जोश मलीहाबादी

देश के लिए कुछ करने वाले,
सिर्फ बातें करा नहीं करते .
चाहे देनी पड़े अपनी जान ,
किसी से डरा नहीं करते .

प्रेम गीत कैसे लिखूँ
जब चारो तरफ गम के बादल छाये है
नमन है उन वीर शहीदों को
जो तिरंगा ओढ के आए है

शहीद
काव्य चर्चा
ये हैं शहीदों पर 10 बड़े शेर…
काव्य डेस्क, नई दिल्ली

आजादी के रखवालों को, सीमा के पहरेदारों को शायरों ने हमेशा रचनात्मक सम्मान दिया है। बिस्मिल, अशफ़ाक, भगत सिंह जैसे अमर शहीदों ने आजादी की लड़ाई कई स्तरों पर लड़ी, लोगों में देशभक्ति का ज़ज़्बा जगाने के लिये उनके रचनात्मक अवदान, इतिहास में लकीर हैं। आइये पढ़ते हैं वतन पर कुर्बान होने वाले शहीदों पर शायरों के ज़ज़्बात-

न इंतिज़ार करो इनका ऐ अज़ा-दारो
शहीद जाते हैं जन्नत को घर नहीं आते
-साबिर ज़फ़र

क्या मोल लग रहा है शहीदों के ख़ून का
मरते थे जिन पे हम वो सज़ा-याब क्या हुए
-साहिर लुधियानवी
शहीदों की चिताओं पर जुड़ेंगे हर बरस मेले
वतन पर मरनेवालों का यही बाक़ी निशाँ होगा
– जगदंबा प्रसाद मिश्र ‘हितैषी’

जब देश में थी दीवाली, वो खेल रहे थे होली
जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली
-कवि प्रदीप
अजल से वे डरें जीने को जो अच्छा समझते हैं।
मियाँ! हम चार दिन की जिन्दगी को क्या समझते हैं?
– रामप्रसाद बिस्मिल

मौत एक बार जब आना है तो डरना क्या है!
हम इसे खेल ही समझा किये मरना क्या है?
-अशफ़ाकउल्ला खां

मेरे जज्बातों से इस कदर वाकिफ हैं मेरी कलम
मैं इश्क भी लिखना चाहूँ तो भी, इंकलाब लिख जाता हैं !
– भगत सिंह

मर के पाया शहीद का रुत्बा
मेरी इस ज़िंदगी की उम्र दराज़
-जोश मलीहाबादी
हम शहीदों को कभी मुर्दा नहीं कहते ‘अनीस’
रिज़्क़ जन्नत में मिले शान यहाँ पर बाक़ी
-अनीस अंसारी

तैरना है तो समंदर में तैरो,
नदी नालों में क्या रखा है,
प्यार करना है तो वतन से करो,
इन बेवफा लोगों में क्या रखा है।

”सैंकड़ों परिंदे आसमान पर आज नजर आने लगे”
”बलिदानियों ने दिखाई है राह उन्हें आजादी से उड़ने की”
-अज्ञात

ना पूछो जमाने को
क्या हमारी कहानी है
हमारी पहचान तो सिर्फ ये है
की हम सिर्फ हिन्दुस्तानी है

‘सैंकड़ों परिंदे आसमान पर आज नजर आने लगे”
”बलिदानियों ने दिखाई है राह उन्हें आजादी से उड़ने की”
-अज्ञात

खूब बहती है अमन की गंगा बहने दो,
मत फैलाओ देश में दंगा रहने दो,
लाल हरे रंग में ना बाटों हमको,
मेरे छत एक तिरंगा रहने दो।

अपनी आज़ादी को हम हरगिज भुला सकते नहीं,
सर कटा सकते है लेकिन सर झुका सकते नहीं।
देश के शहीदो को नमन।

चलो फिर से आज वो नजारा याद कर ले
शहीदों के दिल में थी जो ज्वाला वो याद कर ले
जिसमे बहकर आजादी पहुंची थी किनारे पे
देशभक्तों के खून की वो धरा याद कर ले

शहीदों को सलाम शायरी
तिरंगे में लिपटी लाशो में दो थे नाम,
एक था “अली” तो एक था “श्याम”
हिंदुस्तान-ए-मोहब्बत में दोनों ने दी थी जान,
फिर भी हमने उन्हें बांट दिया,
कहकर हिंदू और मुसलमान।

मैं जला हुआ राख नहीं, अमर दीप हूं,
जो मिट गया वतन पर मैं वो शहीद हूं।
भारत माता की जय

इतनी सी बात हवाओ को बताए रखना
रोशनी होगी चिरागों को जलाए रखना
लहू देकर की है जिसकी हिफाजत हमने
ऐसे तिरंगे को हमेशा अपने दिल में बसाए रखना

Shahid Diwas Par Shayari Photos

ने हमारे बाजूओं में है दम कम,
ने ही है हमारे हौसलों में दरारें,
इन सरहदों की जंगो में,
हम अपने ही हमवतनों से हारे हैं।

shahid diwas shayari

जब देश में थी दिवाली, वो खेल रहे थे होली,
जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली।

जब देश में थी दीवाली,
वो खेल रहे थे होली,
जब हम बैठे थे घरों में,
वे झेल रहे थे गोली।

लिख रहा हूँ मैं अंजाम जिसका कल आगाज आएगा
मेरे लहू का हर कतरा इंकलाब लाएगा
मैं रहू या ना रहूँ पर एक वादा है तुमसे मेरा
की मेरे बाद वतन पे मरने वालो का सैलाब आएगा

शहीदों को समर्पित शायरी
उड़ जाती है नींद ये सोचकर,
की सरहद पे दी गयी वो कुर्बानियाँ,
मेरी नींद के लिए थी।

लड़े वो वीर जवानों की तरह
ठंडा खून भी फौलाद हुआ
मरते – मरते भी कई मार गिराए
तभी तो देश आजाद हुआ

चलो फिर से आज वो नजारा याद कर ले,
शहीदों के दिल में थी जो ज्वाला वो याद कर ले,
जिसमे बहकर आजादी पहुंची थी किनारे पे,
देशभक्तों के खून की वो धरा याद कर लें।

shaheed diwas shayari photos

सीनें में ज़ुनून ऑखों में देंशभक्ति की चमक रखता हुँ
दुश्मन के साँसें थम जाए, आवाज में वो धमक रखता हुँ

चलो फिर से खुद को जगाते है,
अनुशासन का झंडा फिर से घुमाते है,
सुनहरा रंग है गणतंत्र का शहीदों के लहूँ से,
ऐसे शहीदों को हम सर झुकाते है।

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